Amit Shah Reaction on EC Verdict: चुनाव आयोग ने उद्धव गुट को बड़ा झटका देते हुए शिवसेना का चुनाव चिन्ह और पार्टी का नाम शिंदे गुट को दे दिया है. इस फैसले के बाद चुनाव आयोग उद्धव गुट के निशाने पर है. उन्होंने आयोग के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का निर्णय लिया है. इस बीच, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसपर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने शनिवार को पुणे में एक कार्यक्रम में कहा, कल चुनाव आयोग ने दूध का दूध पानी का पानी कर दिया.
पुणे में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा, कल एकनाथ शिंदे की शिवसेना को असली शिवसेना और धनुष बाण दोनों मिल गए. जो लोग झूठ के आधार पर हुंकार भरते थे उन लोगों को आज मालूम पड़ गया है कि सत्य किसके साथ है? आज पुणे के कार्यकर्ताओं को एक संकल्प करके जाना है कि महाराष्ट्र की सभी सीटें शिवसेना और BJP के खाते में आएंगे. इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी मौजूद रहे.
चुनाव आयोग ने क्या फैसला दिया था?
चुनाव आयोग ने शुक्रवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले समूह को ‘शिवसेना’ नाम और उसका चुनाव चिह्न ‘तीर-कमान’ आवंटित किया. शिंदे द्वारा दायर छह महीने पुरानी याचिका पर एक सर्वसम्मत आदेश में, तीन सदस्यीय आयोग ने ठाकरे गुट को शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नाम और ‘मशाल’ चुनाव चिह्न को बनाए रखने की अनुमति दी, जो उसे राज्य में विधानसभा उपचुनावों के समाप्त होने तक एक अंतरिम आदेश में दिया गया था.
यह पहली बार है जब ठाकरे परिवार ने 1966 में बालासाहेब ठाकरे द्वारा स्थापित पार्टी का नियंत्रण खो दिया है. पार्टी ने हिंदुत्व को अपनी प्रमुख विचारधारा के रूप में अपनाया था और 2019 तक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ गठबंधन किया था, जब उद्धव ठाकरे ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) और कांग्रेस की मदद से सरकार बनाने के लिए गठबंधन तोड़ दिया था.
आयोग ने कहा कि वर्ष 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में शिवसेना के 55 विजयी उम्मीदवारों में से एकनाथ शिंदे का समर्थन करने वाले विधायकों के पक्ष में लगभग 76 फीसदी मत पड़े. महाराष्ट्र में 2019 के विधानसभा चुनाव में शिवसेना के विजयी उम्मीदवारों के पक्ष में मिले मतों से 23.5 प्रतिशत मत उद्धव ठाकरे धड़े के विधायकों को मिले थे.
आयोग ने कहा कि प्रतिवादी (ठाकरे गुट) ने चुनाव चिह्न और संगठन पर दावा करने के लिए पार्टी के 2018 के संविधान पर बहुत भरोसा किया था, लेकिन पार्टी ने संविधान में संशोधन के बारे में आयोग को सूचित नहीं किया था. आयोग ने कहा कि शिवसेना का 2018 में संशोधित किया गया संविधान आयोग के रिकॉर्ड में नहीं है. आयोग ने कहा कि उसने पाया कि पार्टी का संविधान, जिस पर ठाकरे गुट पूरा भरोसा कर रहा था, अलोकतांत्रिक था.







