औरंगजेब जब मुल्तान में था तो शैख अबू उससे मिला था. उसकी काबिलियत से खुश होकर औरंगज़ेब ने उसे अपना सचिव बना लिया था. अप्रैल के महीने में एक बैठक चल रही थी. अचानक औरंगज़ेब बैठक छोड़कर हीराबाई के कमरे की तरफ जाने लगा. मीर खलील बुरहानपुर का सूबेदार था, वह तो इस बात का शुरू से ही राजदार था. लेकिन सल्तनत की खराब हालत देखकर उस दिन उसे औरंगजेब की इस हरकत पर गुस्सा आ गया. इसके बाद अपनी आदत के मुताबिक वह जोर-जोर से बड़बड़ाने लगा. जो राज अब तक खास लोगों के बीच में था, वह अब कई जागीरदारों और हाकिमों के कानों तक पहुंच गया.
हीराबाई को यह सूचना पहले ही मिल चुकी थी कि औरंगजेब इजलास से उसके यहां के लिए निकल गया है. उसने ऊर्दाबेगनी से तुंरत खाने-पीने का इंतज़ाम करने को कहा और बांदियां बुलाकर कमरा सही कराया. जब औंरगजेब कमरे में आया था तो वो परेशान था. हीराबाई ये जान गई थी. उसने तुरंत शराब का एक जाम तैयार किया और औरंगजेब के सामने हाजिर किया.
इतिहास में इस घटना के बारे में दो अलग-अलग कहानियां हैं. पहली कहानी कहती है कि जैनाबादी के साथ औरंगज़ेब शराब पीना सीख गया था और अक्सर नशे में रहता था. वहीं दूसरी कहानी कहती है कि उस दिन पहले तो औरंगजेब ने जाम पीने से मना किया. लेकिन जब हीरााबई ने उस पर जोर डाला तो उसने शराब पीने के लिए जाम होठों से लगा लिया. यह देखते ही हीराबा ने जाम उसके हाथ से छीनकर फेंक दिया






